
आकाश १३ बर्ष का एक लड़का है जो बिहार राज्य से है वह अपने घर का सबसे बड़ा बेटा है उसकी माँ आकाश और उसके भाई बहनों के साथ पन्नी कचरा बीनने का काम करके घर चलाती थी. शायद आकाश ही क्या किसी भी बच्चे को इस किस्म के काम पसंद नहीं होते साथ में रोज बा रोज की बाप की मार और गालियाँ बाप का शराब पीकर दुर्व्यवहार से तंग आकर आकाश ने ९ वर्ष की उम्र में घर छोड़ने का फैसला ले लिया और वह बिहार से भोपाल आ गया.मेरा मानना है की घर छोड़ने जैसा कठिन फैसला फ़ौरन नहीं लिया जाने वाला होता है एक लम्बे समय के उत्पीडन से विद्रोह के बाद ही ऐसे फैसले लिए जाते हैं और आकाश ने भी ये फैसला बहुत सोच समझ कर ही लिया होगा.आकाश से बात करने पर ही उसके इस फैसले के पीछे के दर्द को समझा जा सकता हैं पर उसका मानना है की उसका घर छोड़ने का फैसला एकदम सही है उसे यहाँ न तो बाप की मार खानी है और न ही वह किसी बंधन में हैंवो जो करना चाहे कर सकता है दूसरी तरफ न तो उसके पास कोई घर है और न ही खाने को ,हमारे मुताबिक उसकी इस तरह की जिन्दगी खतरनाक है.
आकाश से बात चीत करने पर पता चला की वह पटना स्टेशन पर किसी ट्रेन में चढ़ गया था और भोपाल आ गया वो भूखा था यहाँ पर उसे कुछ अपने हम उम्र लड़के मिले वो सब भी कभी अपने घर को छोड़ कर आये हुए थे. आकश की मदद में उसके वो ही प्लेटफोर्म वाले दोस्त आये जिन्होंने उसे समोसे खाने को दिए साथ ही whitener से भीगा हुआ एक कपडे का टुकड़ा जो नशे के काम तो आता ही है साथ साथ उसकी पेट की भूख को भी ख़त्म करता है जब कम पैसे होते हैं तब वो अपने दोस्तोंके साथ मिलकर भूख मिटाने के लिए whitner पी लेता है (भोपाल प्लेटफोर्म के बहार whitner राशन की दूकान पर भी मिलता है) अब आकाश स्वतंत्र है कितना खुश है ये तो नहीं पता ??क्यूंकि प्लेटफोर्म पर भी जी. आर .पी.और यात्रियों की गालिया और मार खाता है
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