Wednesday, July 28, 2010

aakash ki kahani


आकाश १३ बर्ष का एक लड़का है जो बिहार राज्य से है वह अपने घर का सबसे बड़ा बेटा है उसकी माँ आकाश और उसके भाई बहनों के साथ पन्नी कचरा बीनने का काम करके घर चलाती थी. शायद आकाश ही क्या किसी भी बच्चे को इस किस्म के काम पसंद नहीं होते साथ में रोज बा रोज की बाप की मार और गालियाँ बाप का शराब पीकर दुर्व्यवहार से तंग आकर आकाश ने ९ वर्ष की उम्र में घर छोड़ने का फैसला ले लिया और वह बिहार से भोपाल आ गया.मेरा मानना है की घर छोड़ने जैसा कठिन फैसला फ़ौरन नहीं लिया जाने वाला होता है एक लम्बे समय के उत्पीडन से विद्रोह के बाद ही ऐसे फैसले लिए जाते हैं और आकाश ने भी ये फैसला बहुत सोच समझ कर ही लिया होगा.आकाश से बात करने पर ही उसके इस फैसले के पीछे के दर्द को समझा जा सकता हैं पर उसका मानना है की उसका घर छोड़ने का फैसला एकदम सही है उसे यहाँ न तो बाप की मार खानी है और न ही वह किसी बंधन में हैंवो जो करना चाहे कर सकता है दूसरी तरफ न तो उसके पास कोई घर है और न ही खाने को ,हमारे मुताबिक उसकी इस तरह की जिन्दगी खतरनाक है.
आकाश से बात चीत करने पर पता चला की वह पटना स्टेशन पर किसी ट्रेन में चढ़ गया था और भोपाल आ गया वो भूखा था यहाँ पर उसे कुछ अपने हम उम्र लड़के मिले वो सब भी कभी अपने घर को छोड़ कर आये हुए थे. आकश की मदद में उसके वो ही प्लेटफोर्म वाले दोस्त आये जिन्होंने उसे समोसे खाने को दिए साथ ही whitener से भीगा हुआ एक कपडे का टुकड़ा जो नशे के काम तो आता ही है साथ साथ उसकी पेट की भूख को भी ख़त्म करता है जब कम पैसे होते हैं तब वो अपने दोस्तोंके साथ मिलकर भूख मिटाने के लिए whitner पी लेता है (भोपाल प्लेटफोर्म के बहार whitner राशन की दूकान पर भी मिलता है) अब आकाश स्वतंत्र है कितना खुश है ये तो नहीं पता ??क्यूंकि प्लेटफोर्म पर भी जी. आर .पी.और यात्रियों की गालिया और मार खाता है
यहाँ आकाश की पहचान जित्तू बजरिया नाम के आदमी से हुई जो प्लेटफोर्म पर रहने वालो बच्चो को ट्रेन में बेचने के मूंगफली,चाबी के छल्ले,इत्यादि देता है बदले उन्हें कुछ पैसा भी देता है.आकाश अब अपनी मर्ज़ी के मुताबिक जिन्दगी बसर कर रहा है,